सवाल जहर का नहीं था वो तो मैं पी गया. . .
तकलीफ लोगों को तब हुई जब मैं थोड़ा जी गया. .

है मोहलत चार दिन की और हैं “सौ” काम करने को
हमें “जीना” भी है, “मरने” की तैयारी भी करनी है

कभी आँखों पे कभी सर पे बिठाए रखना
ज़िंदगी तल्ख़ सही दिल से लगाए रखना

काश आदमी के गिरने की हद भी तय होती
तो बेटियाँ इस मुल्क की शायद महफूज़ होती

ज़िन्दगी ये चाहती है कि ख़ुदकुशी कर लूँ, 
मैं इस इन्तज़ार में हूँ कि कोई हादसा हो जाए।

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है  सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते है
सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते है ये बात है तो चलो बात करके देखते है

मैंने ज़िल्लत और रूस्वाई के बाद भी अगर…
किसी को मुहब्बत पर क़ायम देखा तो वो ‘औरत’ है…!!